Description
भारतीय साहित्य में विशिष्ट और किंवदंती समान स्थान रखने वाले विनोद कुमार शुक्ल की कविताएँ मनुष्य के भीतर छिपे उस एकांत से परिचय कराती हैं जहाँ मनुष्य होना ही एक गहरी अनुभूति बन जाता है। उनका काव्य संसार पाठक को साधारण अनुभवों के भीतर असाधारण अर्थ खोजने की दृष्टि देता है।
उनकी नवीनतम कृति एक पूर्व में बहुत से पूर्व एक ऐसा काव्य अनुभव है जो पढ़ने के बाद लंबे समय तक भीतर गूंजता रहता है। यह संग्रह केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि संवेदना का विस्तृत भूगोल है। इन कविताओं से गुजरना अपेक्षा से कहीं अधिक प्राप्त कर लेने जैसा है, एक ऐसा सुख जिसे पूरी तरह शब्दों में बाँध पाना संभव नहीं।
इस काव्य संसार में घर और दुनिया अलग नहीं हैं। पहाड़, जंगल, पेड़, तितलियाँ, पक्षी, समुद्र, नक्षत्र और भाषाएँ सभी एक ही जीवंत अनुभव का हिस्सा बन जाते हैं। यहाँ परिचित और अपरिचित के बीच की दूरी मिट जाती है। कवि सहयोग, सहवास, एकांत और सार्वभौमिकता के अर्थों को नए सिरे से खोलते हैं।
यह संग्रह पाठक को ठहरने, सोचने और अपने भीतर झाँकने के लिए आमंत्रित करता है। समकालीन समय में, जब जीवन की गति बहुत तेज है, यह कृति एक आवश्यक और समयानुकूल पाठ बन जाती है। यह केवल कविता प्रेमियों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी के लिए है जो शब्दों के माध्यम से दुनिया को नए ढंग से देखना चाहते हैं।





Shalini Dubey –
कविताएँ सरल दिखती हैं पर अर्थों में बहुत विस्तृत हैं। कुछ रचनाएँ तुरंत समझ में नहीं आतीं, लेकिन वही उनकी खूबसूरती है। यह किताब बार बार पढ़े जाने योग्य है।
Poonam Yadav –
इन कविताओं में एक अजीब सा सन्नाटा है, लेकिन वही सन्नाटा सबसे ज्यादा बोलता है। घर और संसार के बीच जो रिश्ता उन्होंने बनाया है, वह बहुत सुंदर है। पढ़कर लगा जैसे कुछ बदल गया है भीतर।
Rituparna Sen –
यह संग्रह पढ़ते समय लगा जैसे प्रकृति और मनुष्य के बीच कोई अदृश्य संवाद चल रहा हो। कवि का संसार बहुत आत्मीय है। अपरिचित चीजें भी अपनी लगने लगती हैं। लंबे समय बाद ऐसी कविताएँ पढ़ीं जो भीतर टिक जाती हैं।
Sandeep Rao –
I ordered this book after seeing it at Kitaab Paglu bookstore and I am glad I did. The poems are quiet yet powerful. They demand patience from the reader. Not a light read, but definitely a rewarding one.
Meera Tandon –
विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ना हमेशा एक आंतरिक यात्रा जैसा होता है। इस संग्रह ने मुझे धीमा कर दिया। हर कविता के बाद कुछ देर रुकना पड़ा। कुछ पंक्तियाँ इतनी साधारण दिखती हैं, लेकिन उनके भीतर पूरा ब्रह्मांड छिपा होता है।